आदिवासी
वे जो सुविधा भोगी हैं
या मौका परस्त हैं
या जिन्हें आरक्षण चाहिए
कहते हैं हम आदिवासी हैं ,
वे जो वोट चाहते हैं
कहते हैं तुम आदिवासी हो ,
वे जो धर्म प्रचारक हैं
कहते हैं
तुम आदिवासी जंगली हो ।
वे जिनकी मानसिकता यह है
कि हम ही आदि निवासी हैं
कहते हैं तुम वनवासी हो ,
और वे जो नंगे पैर
चुपचाप चले जाते हैं जंगली पगडंडियों में
कभी नहीं कहते कि
हम आदिवासी हैं
वे जानते हैं जंगली जड़ी-बूटियों से
अपना इलाज करना
वे जानते हैं जंतुओं की हरकतों से
मौसम का मिजाज समझना
सारे पेड़-पौधे , पर्वत-पहाड़
नदी-झरने जानते हैं
कि वे कौन हैं ।
अनिल गंगल की कविताऍं
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*आवाज़ जो पर्दे से बाहर थी *
*" नाना "*
नाना,
तुमने अभिनय नहीं किया—
तुमने आदमी के भीतर
छिपी हुई आग को
उसका चेहरा दिया।
तुम्हारी आवाज़
संवाद नह...
2 हफ़्ते पहले
