प्रकर्ष मालवीय "विपुल" की कविताएँ
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1.
*आवाज़ आ रही है*
आवाज़ आ रही है?
फ़ेसबुक लाइव शुरू करते हुए
विद्वतजन ने पूछा-
आवाज़ आ रही है?
और अनगिनत सहमतियों में बनी
ऊपर उठ...
3 हफ़्ते पहले
