मैं संतूर नहीं बजाता
संतूर नहीं बजाता
नहीं बजाता तो नहीं बजाता
पर क्या बात कि नहीं बजाता
है तो कितना बेतुका आघात
कि मैं संतूर नहीं बजाता
कैसे इतना जीवन गुजर गया
मुझे खयाल तक नहीं आया
कि मैं संतूर नहीं बजाता !
और होते-होते हालत आज ये हुई
कि मैं इतनी बड़ी दुनिया में
संतूर नहीं बजाता !
कोई संगीतज्ञ नहीं हूँ मगर
जानना है मुझे आख़िर
क्या था वह जो
मेरे और संतूर के बिच अडा रहा
यह नहीं कि मैं बजाना चाहता हूँ
जानना चाहता भर हूँ आख़िर वह
क्या था
मेरे और संतूर के बीच
कि मैं दूर-दूर तक
संतूर नहीं बजाता।
अनिल गंगल की कविताऍं
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*आवाज़ जो पर्दे से बाहर थी *
*" नाना "*
नाना,
तुमने अभिनय नहीं किया—
तुमने आदमी के भीतर
छिपी हुई आग को
उसका चेहरा दिया।
तुम्हारी आवाज़
संवाद नह...
3 हफ़्ते पहले
