तय तो यही हुआ था
सबसे पहले बायाँ हाथ कटा
फिर दोनों पैर लहूलुहान होते हुए
टुकडों में कटते चले गए
खून दर्द के धक्के खा खा कर
नसों से बहार निकल आया था
तय तो यही हुआ था कि मैं
कबूतर कि तौल के बराबर
अपने शरीर का मांस काटकर
बाज को सौंप दूँ
और वह कबूतर को छोड़ दे
सचमुच बड़ा असहनीय दर्द था
शरीर का एक बड़ा हिस्सा तराजू पर था
और कबूतर वाला पलड़ा फिर नीचे था
हर कर मैं
samucha hi taraju par chadh gaya
aasaman se phool nahin barase
kabootar ne koi doosara roop nahin liya
aur maine dekha
baaj ki dadh me
aadami ka khoon lag chuka hai .
