आदिवासी
वे जो सुविधा भोगी हैं
या मौका परस्त हैं
या जिन्हें आरक्षण चाहिए
कहते हैं हम आदिवासी हैं ,
वे जो वोट चाहते हैं
कहते हैं तुम आदिवासी हो ,
वे जो धर्म प्रचारक हैं
कहते हैं
तुम आदिवासी जंगली हो ।
वे जिनकी मानसिकता यह है
कि हम ही आदि निवासी हैं
कहते हैं तुम वनवासी हो ,
और वे जो नंगे पैर
चुपचाप चले जाते हैं जंगली पगडंडियों में
कभी नहीं कहते कि
हम आदिवासी हैं
वे जानते हैं जंगली जड़ी-बूटियों से
अपना इलाज करना
वे जानते हैं जंतुओं की हरकतों से
मौसम का मिजाज समझना
सारे पेड़-पौधे , पर्वत-पहाड़
नदी-झरने जानते हैं
कि वे कौन हैं ।
रमा त्यागी ' एकाकी ' की कविताऍं
-
एक
*पहली कविता *
पहली कविता
जिसने भी लिखी होगी
दर्द में लिखी होगी
या शायद प्रेम में !
प्रेम कविताएँ
सिर्फ़ उन्हें ही पसंद आती हैं
जो प्रेम...
3 दिन पहले